Suhagrat Me Sex Jaruri Hai?

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क्या सुहागरात में सेक्स करना जरूरी है?

अधिकतर व्यक्तियों के लिए सुहागरात का एक मात्र उद्देश्य केवल सेक्स ही होता है। उनकी सोच होती है कि शादी हो गई है, अब तो सेक्स करने का लाइसेंस मिल गया। आज तो हर हाल में अपने पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बनाकर ही दम लेंगे। यहां तक कि सेक्स की इच्छा केवल सुहागरात तक ही सीमित नहीं होती, बल्कि शादी के बाद कई महीनों व वर्षों के बाद भी उनका मक्सद केवल शादी के लेकर सेक्स ही होता है। क्योंकि शादी के बाद सेक्स एक तो वैध होता है वहीं दूसरी ओर इसमें शर्म या संकोच कि कोई जगह नहीं होती। पुरुष व स्त्री शादी के बाद के इन संबधों को अलग-अलग नजरिए से देखते हैं।

सुहागरात को लेकर पुरूष सबसे ज्यादा उत्सुक रहते हैं। ऐसा नहीं है कि स्त्री के मन में कोई भाव नहीं उठते या सुहागरात को लेकर उनके मन में रोमांचक सपने नहीं होते। उनके लिए भी यह एक अनोखा और रोमांचक पल होता है, जिसके लिए वह भी मन ही मन बेकरार हो रही होती है। मगर स्त्रियां सर्वप्रथम अपने पार्टनर के साथ सहज महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं और उनके अंदर संयम शक्ति भी प्रबल होती है।
जहां पुरूष शादी को या सुहागरात को एक स्वादिष्ट लड्डू की तरह देखता है, तो वहीं दूसरी ओर स्त्री इसे अपनी आशाओं की पाराकाष्ठा के रूप में देखती है। मगर प्रश्न अभी भी वही उठता है कि सुहागरात में सेक्स कितना महत्वूर्ण है? क्या शारीरिक संबध के बिना सुहागरात या सुखी वैवाहिक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती?

Suhagrat Me Sex Jaruri Hai

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आइए जानते हैं…
सुहागरात को लेकर स्त्री और पुरूष द्वारा इसके दो दृष्टिकोण होते हैं। स्त्री शारीरिक संबंध पुरुष के करीब रहने के लिए बनाती है। उसे अपने पुरूष साथी के साथ सटकर सोना और दुलार दिखाना अधिक भाता है और वह मानसिक तौर पर अपने पति से जुड़े रहना चाहती है। वहीं पुरुष के लिए संभोग सिर्फ संभोग होता है।
अगर सुहागरात में सेक्स को लेकर पति-पत्नी के बीच आपसी तालमेल व समझ नहीं होगी, तो सेक्स केवल औपचारिकता भर रह जायेगी और इसका सही अर्थ… अनर्थ में परिवर्तित हो जायेगा। सुहागरात में पत्नी से जबरन कोई सेक्सुअल क्रिड़ा न करे। उसकी भावनाओं की कद्र करें। अगर पुरूष अपनी महिला साथी के साथ पहली रात्रि को ही यह दर्शाता है कि उसके लिए केवल सेक्स जरूरी है, साथी के प्रति प्यार, समपर्ण की भावना कोई मायने नहीं रखती तो यह बहुत गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।

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जैसे-जैसे दिन गुजरते जाते हैं, दोनों के बीच शारीरिक संबध बनाने को लेकर उदासीनता आती जाती है और आखिरकार दोनों के बीच शारीरिक संबंध बनना लगभग बंद हो जाता है। ऐसे में कई दिनों तक दूर रहने के बाद जब वे शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो दोनों के बीच कुछ पहले जैसा नहीं होता और फिर से उनका शारीरिक संबध के प्रति मोह भंग होने लगता है। लेकिन अच्छे शारीरिक संबंधों की याद लंबे समय तक रहती है।

Suhagrat Me Sex Jaruri Hai?

जब लोगों के वैवाहिक संबंध टूटने की कगार पर आ जाते हैं, तो शादी सलाहकार कहते हैं, कि आपको अपने संबंधों की जड़ों को टटोलना चाहिए और जानने की कोशिश करनी चाहिए कि आखिर क्या ऐसी चीज है जो आपसे अनजाने में छूट रही है..?

आइए अब जानते हैं कि सुहागरात पर सेक्स के अलावा क्या करें..
सुहागरात यानी नव विवाहिज जोड़ों की वो पहली रात, जिसमे वो पूरी तरह से स्वतंत्र होते हैं और एक-दूसरे के साथ जो चाहे वों कर सकते हैं। लेकिन आज के समय में और पहले से भी बहुत सारे लोगो की यह मान्यता रही है कि यह दिन सिर्फ स्त्री और पुरुष के लिए केवल खुलकर सेक्स करने के लिए होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सुहागरात तो केवल एक नाम है, जो शादी की पहली रात कहलाता है। यानी शादी के बाद पति-पत्नी की जो पहली रात होती है उसे सुहागरात कहते हैं और ऐसा कहीं नहीं लिखा गया है कि सुहागरात में सेक्स अनिवार्य या सुहागरात में सेक्स करना ही चाहिए। नहीं भी करेंगे तो कोई अनर्थ नहीं हो जायेगा। आप दोनों का साथ तो जीवन भर का है, इसलिए इस पूर जीवन को केवल एक रात से जोड़ना सही नहीं है।

सुहागरात में सेक्स के अलावा भी बहुत सारी चीजे ऐसी है जो आप कर सकते हैं..
बाते करें: पहली बार खुलकर और अधिकार स्वरुप एक-दूसरे के सामने आना भी सुहागरात का मतलब होता है और आप इस दौरान ऐसी बातें कर सकते हैं जोकि आपने फोन पर या मिलने पर अपने पार्टनर को नहीं बताईं। आप उनसे अपने मन में दबे हुए कुछ ऐसे जज़्बात कहें, जो आप उस वक्त या शादी से पहले कहना चाहते थे।

भविष्य की बातें: सुहागरात को आप हमेशा के लिए आपके हो चुके पार्टनर के साथ भविष्य और आगे के जीवन की बातें कर सकते हैं और उन्हें बता सकते हैं कि आप क्या करना चाहते हैं और आपकी फ्यूचर प्लानिंग क्या है? आपकी इस ईमानदारी से आपका पार्टनर उससे कहीं ज्यादा खुश होगा, की आप उसे सेक्स में खुश करें।

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उपहार दें: इस दौरान आप एक-दूसरे को उपहार देकर अपने प्यार का इजहार जता सकतेे हैं और यह केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि स्त्रियों को भी करना चाहिए।

वादे: एक रिश्ते को चलाने और उसे सही से निभाने के लिए आप एक-दूसरे सच्चे वादे करें। यही सबसे सही समय होता है, जब आप वो सब वादे कर सकते हैं, जो शायद आपने अभी तक नहीं किये और आगे नहीं करने वाले। जीवन में एक-दूसरे को हर कदम में सपोर्ट करना और पूरा भरोसा करना जैसे वादे आपके पार्टनर को बहुत खुश और प्रभावित करेेंगे।

आराम: शादी की कई रस्में निभाते-निभाते आप थक जाते हैं, जिससे आप इस दिन आराम कर सकते हैं। संभोग को अगले दिन के लिए विराम दे सकते हैं।

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