Suhagrat Me Kaise karen

Suhagrat Me Kaise karen

ऐसे मनायें सुहागरात, बन जाये हर बात!

पति-पत्नी का पहला मिलन यानी सुहागरात उनके विवाहित जीवन का पहला दरवाजा खुलने की तरह है और इस दरवाजे को पार करने के लिए पति-पत्नी दोनों को ही बड़ी समझ व धैर्य से काम लेना चाहिए, क्योंकि सुहागरात मर्द शक्ति व समझदारी की पहली परीक्षा होती है और इस परीक्षा की घड़ी में जरा-सी असावधानी से पूरी जिंदगी में गांठ लग जाती है, जो खुशहाल विवाहित जीवन के लिए अच्छी बात नहीं होती। क्योंकि किसी भी कारण से पति-पत्नी का टूटा हुआ दिल फिर से जुड़ना संभव नहीं हो पाता।

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पहले मिलन की रात पति-पत्नी के बीच पहला परिचय कराती है और उस समय उन दोनों का परिचय कराने वाला कोई अन्य व्यक्ति भी उस समय उनके सुहागकक्ष में मौजूद नहीं होता। बल्कि पति-पत्नी को आपस में ही समझ कर, बातचीत से, एक-दूसरे पर विश्वास कर एक-दूजे क दिलों में खास घर और प्रेम बनाने की जरूर पड़ती है। यही प्यार उनके सारे जीवन के लिए स्थायी बन जाता है।
पहले मिलन में पुरूष को अपनी पत्नी के सामने भूलकर भी किसी अन्य स्त्री के रूप के गुणों की चर्चा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि स्त्री की सबसे बड़ी कमज़ोरी होती है कि वह अपने ही सामने अपने ही पति द्वारा किसी अन्य स्त्री के रूप-सौंदर्य की प्रशंसा बर्दाश्त नहीं कर सकती। वह अपने पति से केवल और केवल अपनी ही प्रशंसा सुनना चाहती है। वह चाहती हैं कि पति के दिल में हमेशा वो ही राज करे। अब यह पूरी तरह से पति पर निर्भर करता है कि उसे राज करना है, या पत्नी को नाराज करना है। इसके पीछे स्त्रियों का ईष्र्यालु स्वभाव भी एक कारण होता है।

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आप अपने पहले मिलन में अपनी पत्नी की जितनी प्रशंसा करेंगे, उतनी ही जल्दी वह आपके व्यवहार पर मुग्ध होकर अपना सर्वस्व आपके सुर्पूद कर देगी। लेकिन पुरूष को भी ऐसी स्थिति में जल्दबाजी से काम नहीं लेना चाहिए, बल्कि धैर्य व संयम से धीरे-धीरे आलिंगन तथा चुम्बन आदि क्रिया के द्वारा आगे बढ़ें, क्योंकि प्रथम संभोग में स्त्री को थोड़ा कष्ट होता है, अतः पुरूष के स्त्री के होने वाले कष्ट का भी ध्यान रखना चाहिए। अपने प्यार से पत्नी को होने वाले कष्ट की झिझक दूर करके ही पहली सीढ़ी पर चढ़ें, जिससे आपकी पत्नी के मन में आपके प्रति एक सच्चे हमदर्द पति की छवि बनेगी। इसके विपरीत यदि आप अपने मन पर काबू न पाकर कामेच्छा के वशीभूत होकर जल्दबाजी में सहवास करने लगेंगे तो पत्नी के मन में आप केवल कामुक और स्वाथी पति बनकर रह जायेंगे। उसके मन में मधुर विवाहित जीवन का संजोया हुआ सपना बिखर जायेगा।

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याद रखिये पति-पत्नी सुखी विवाहित जीवन की गाड़ी के दो पहिए होते हैं। उन पहियों के तालमेल से ही विवाहित जीवन का सारा सफर सुख-शांति से पूरा होता है। पहले मिलन की रात वो रात होती है, जिसकी यादगार पूरी जिंदगी के लिए एक-दूसरे के मन में अमिट छाप छोड़ती है। यदि यादगार उनके खुशहाल विवाहित जीवन की नींव बन जाती है। मगर कुछ अज्ञानी पति अपने मन में यह गलत धारणा बना लेते हैं कि पहले मिलन की रात में संभोग के दौरान पत्नी के यौनांग से खून आना जरूरी है, जो उसके कौमार्य की सच्ची पहचान होती है। लेकिन आज की स्थिति और माहौल के बदलाव में यह सोचना बिल्कुल गलत है। कुदरत ने स्त्रियों की योनि के अंदर एक झिल्ली का निर्माण किया हुआ होता है। कुछ लड़कियों की यह झिल्ली बहुत सख्त होती है तथा कुछ लड़कियों की बहुत कोमल व पतली होती है, जो विवाह से पहले ही खेल-कूद में या साइकिल आदि चलाने अथवा बसों में चढ़ते-उतरते चोट लगने से फट व टूट जाती है। ऐसी स्थिति में पहले संभोग में खून आने का प्रश्न ही नहीं होता। इसके विपरीत जिनकी झिल्ली सख्त होती है, वह पहले मिलन में संभोग में आघात प्रतिघात के द्वारा फटती है, जिससे स्त्री के गुप्तांग से खून आने लगता है।

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आज की तेज रफ्तार जिंदगी की व्यस्तता में लगभग 70 प्रतिशत लड़कियों की झिल्ली विवाह पूर्व ही टूटकर नष्ट हो जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपना कौमार्य खो चुकी है तथा चरित्रहीन है। 30 प्रतिशत लड़कियों की झिल्ली सख्त होने पर वे केवल संभोग द्वारा ही नष्ट होती हैं और उसे संभोग में बहुत कष्ट उठाना पड़ता है। पति को चाहिए कि वह ऐसी गलत धारणा को अपने मन से निकाल दें कि पहले मिलन के संभोग में पत्नी की योनि से खून आना जरूरी है।

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