Suhagrat Manane Ka Tarika

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सुहागरात मनाने का तरीका

हिंदू रस्म के अनुसार विवाह के बाद जब स्त्री, पत्नी के रूप में पति के घर में आती है और उस रात को प्रथम बार जब पति-पत्नी को एकांत में मिलने का जो अवसर दिया जाता है, उसे ही सुहागरात कहते हैं। सुहागरात को लेकर स्त्री और पुरूष दोनों के मन में कई प्रकार के प्रश्न और संशय होते हैं। इस रात को कई पुरुष तो यह सोचकर घबराये हुए होते हैं कि मैं अपनी स्त्री को पूर्ण रूप से तृप्त कर भी पाऊँगा या नहीं? कहीं मुझे पत्नी के सामने लज्जित तो नहीं होना पड़ेगा? पता नहीं कैसे शुरूआत करूंगा, बोलूंगा क्या? क्या वह संभोग के दौरान मेरा सहयोग करेगी या नहीं? अगर मैं सुहागरात में असफल रहा, तो जीवन भर मुझे अपनी ही स्त्री के ताने सुनने पड़ेंगे.. इत्यादि.. इत्यादि।

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इस तरह के विचार और संदेह केवल अनपढ़ों में ही नहीं, बल्कि अच्छे खासे पढ़े-लिखे पुरूषों में भी दिखने को मिलते हैं। ऐसा नहीं है कि केवल पुरूष ही इस रात को लेकर परेशान व चिंतित रहते हैं, स्त्रियां भी कई प्रकार के भय और घबराहट से गुजर रही होती हैं। सुहागरात एक ऐसी रात होती है पति-पत्नी के लिए जो उनके वैवाहिक जीवन के भविष्य का फैसला सुना देती है।

सुहागरात पति-पत्नी के जीवन एक अभिन्न हिस्सा व बेहद महत्वपूर्ण दिन होता है। इस रात को धैर्य, प्रेम और आत्मविश्वास से गुजारते हुए आप अपने वैवाहिक जीवन की एक मजबूत नींव रख सकते हैं या फिर अपनी गलतियों से शादीशुदा जिंदगी को हमेशा के लिए खराब कर सकते हैैं।

पुरूषों को विशेषतौर पर यह समझने की जरूरत है कि शादी की पहली रात यानी सुहागरात बहुत ही ज्यादा खास और महत्वपूर्ण होती है। इसे भूलकर या गलती से भी मामूली या साधारण या फिर केवल संभोग से जोड़कर तुच्छ सी रात समझने की नासमझी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि छोटी से छोटी बात आपके सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित कर सकती है।

Suhagrat Manane Ka Tarika

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यदि संकोच और भय की दृष्टिकोण से देखा जाये, तो पुरूष की अपेक्षा स्त्री ज्यादा घबराई और भयभीत होती है, क्योंकि पुरूष के लिए सबकुछ अपना होता है। घर वाले, रिश्ते-नातेदार व वातावरण सब अपना होता है। पहचाना हुआ होता है। लेकिन स्त्री के लिए सबकुछ पहली बार और नया-नया होता है, इसलिए उनका भयभीत होना, संकोची होना स्वाभाविक है।

अब बात की जाये संभोग की दृष्टिकोण की, तो कई हमारे दुल्हे मियां ऐसे भी हैं, जिनका ये मानना होता है कि अगर हम संतुष्ट हो गये हैं, तो अवश्य ही स्त्री भी संतुष्ट हुई होगी। इस तरह की सोच बिल्कुली गलत है। ऐसा भ्रम नहीं पालना चाहिए पुरूषों को, क्योंकि कई पुरुष ऐसे भी होते हैं, जो संभोग के मामले में नासमझ होते हैं, जिसका नतीजा यह होता है कि वे अपनी पत्नी को पूरी तरह से ‘मिलन’ के लिए प्रेरित नहीं कर पाते हैं। जब तक स्त्री के अंदर मिलन के लिए जोश, भावना व उन्माद उत्पन्न नहीं होगा, तब तक स्त्री पूरी तरह से मिलन के लिए तैयार नहीं हो पाती है। पत्नी को संभोग के लिए प्रेरित करने के लिए फोरप्ले करने की जरूरत अधिक महत्वपूर्ण होती है।

पत्नी की ओर से सुहागरात में ठंडापन या फिर उत्साह का अभाव दिखे, तो पुरूषों को अपनी ओर से बेतुके या फिर बेसिर-पैर के मतलब नहीं निकलाने चाहिए। बेकार के भ्रम नहीं पालने चाहिए मन में। जैसे कि कई पुरूष यह मान लेते हैं कि उनकी पत्नी स्वभाव से ही ठंडी है, अज्ञानी है। उसे कुछ पता ही नहीं, कि सेक्स क्या होता है और पति को कैसे खुश रखा जाता है?

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यहां तक तो फिर भी एक बार को स्थिति को समझा जा सकता है, किन्तु हद तो तब हो जाती है, जब कई पुरूष ये सोचने की मूर्खता कर बैठते हैं कि जरूर उनकी पत्नी का विवाह से पहले ही किसी पर-पुरूष से संबंध रहा होगा, तभी तो यह सुहागरात में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। या फिर सही से संभोग में साथ नहीं दे पा रही है। पुरूषों को ऐसा सोचना सरासर गलत है, अज्ञानता है, मूर्खता है, क्योंकि जब आप ही उन्हें भली-भांति संभोग करने के लिए प्रेरित करने में असफल हो रहे हैं, तो उसमें उनका क्या दोष?

एक और सबसे अहम और खास बात का पुरूष लोग ध्यान रखें कि इस रात को पत्नी के साथ संभोग में क्रोध और बल का प्रयोग बिल्कुल न करें। ऐसा करने से आपकी अपनी छवि तो पत्नी की नजरों में खराब होगी ही, साथ ही भविष्य में संभोग के प्रति भी उनके मन में भय, घृणा और संकोच ही हमेशा के लिए घर कर जायेगा।
पत्नी को लगेगा कि आपको केवल उनके तन से प्रेम है। वासना है आपके मन में, प्रेम नहीं है। उनकी भावनाओं और सम्मान की आपको कोई कद्र नहीं है। ऐसा विचार अगर शादी की पहली ही रात में पत्नी के बन में बैठ जायें, तो वैवाहिक जीवन का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

कई पुरूष लोग अपनी सेक्स क्षमता को बढ़ाने के लिए नशे का सहारा ले लेते हैं, जोकि बुरी बात है। वैसे भी किसी भी प्रकार के नशे से कोई सेक्स क्षमता नहीं बढ़ती, यह केवल दिमाग का भ्रम मात्र है। नशा करके संभोग करने से न तो आपको स्वयं आनंद आयेगा और न ही आपकी पत्नी को ही कोई आनंद प्राप्त होगा। इसलिए किसी के बहकावे में आकर सुहागरात में शराब, कोकीन, चरस, अफीम या नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें।

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स्त्रियों की सबसे बड़ी कमजोरी होती है स्वयं की प्रशंसा सुनना। इसलिए आप इस रात को अपनी पत्नी की खूबसूरती की या फिर उसकी किसी एक खास आदत की खुलकर और दिल से प्रशंसा करें। हो सके तो उनके घरवालों की तारीफ या फिर उन्होेंने जो विवाह में प्रबंध किया, उसकी प्रशंसा करें, तो सोने पे सुहागा वाली बात हो जायेगी। ऐसा करने से पत्नी खुद-ब-खुद प्रेम से आपको अपना सर्वत्र सौंप देगी।

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