Suhagrat Ke Vaham

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सुहागरात के वहम

सुहागरात! ये नाम अपने आप में ही एक रोमांच है। जवान हो या बूढ़ा अगर कहीं भी सुहागरात शब्द किसी की जुबान से सुन लें, तो उनका दिल अरमानों से भर जाता है और धड़कते दिल से अपने ही सपनों में सुहागरात की परिकल्पना करने लगता है, कि सुहागरात में ऐसा होगा..वैसा होगा… क्या करेंगे.. क्या नहीं करेंगे आदि बातें सोचते हुए मन-ही-मन खुश होने लगते हैं।
लेकिन हकीकत में सुहागरात क्या है? ज्यादातर सुहागरात को सेक्स के लिए चुनी गई रात के नजरिए से देखा और माना जाता है। जबकि ऐसा जरूरी नहीं है। सुहागरात में केवल दो शरीरों को मिलन ही नहीं होता, बल्कि दो दिलों और आत्माओं का भी मिलन होता है। सुहागरात में भावनात्मक पहलू भी बहुत अहम होता है, जिसमें पति-पत्नी एक-दूसरे की मर्जी का सम्मान करते हुए भावनात्मक रूप से एक साथ जुड़ सकते हैं। न कि अपनी मर्जी एक-दूसरे पर लादकर जबरन कोई क्रीड़ा करनी चाहिए। ऐसा करना आपकी सेक्स लाइफ को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही आपका लंबा वैवाहिक जीवन जो आपने साथ में बिताना है, वो भी खट्टाहस से भर जायेगा।
भले ही ‘सुहागरात‘ शब्द सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित क्यों न रहा हो, पर सुहागरात के विषय में लोगों में बेकार के भ्रम या अफवाह भी कह सकते हैं, काॅमन पाये गये हैं।
ऐसे ही कुछ 7 भ्रम के विषय में हम यहां चर्चा करेंगे, जोकि लोगों की विचारा धारा के अनुसार काॅमन पाये गये हैं…

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पहला भम्र:
स्त्री जब पहली बार संभोग करेगी, तो उस स्त्री को अपने संभोग के पहले अनुभव में बहुत कष्ट से गुजरना पडे़गा। मैथुन क्रीड़ा के दौरान उसे असहनीय पीड़ा का अनुभव करना पडे़गा।
सच्चाई: ऐसा हो, ये जरूरी नहीं हैै। अगर पति-पत्नी के बीच प्यार हो, आपसी समझ का अच्छा तालमेल हो और समझदारी दिखाते हुए दोनों आनंदपूर्ण तरीके से फोरप्ले करते हुए सेक्स के लिए कुछ समय लें, तो इससे स्त्री संभोग के लिए तन और मन दोनों रूप से तैयार हो जाती है। इससे उसे सम्भोग में तकलीफ की संभावना बहुत कम हो जाती है।

दूसरा भम्र:
पुरुष के लिंग का साइज़ अगर अच्छा हो, तो इससे स्त्री को ज्यादा आनंद और संतुष्टी मिलती है। पुरूष के लिंग का आकार ही उसकी सेक्स क्षमता के परिणाम को दर्शाता है।
सच्चाई: ये नजिरया निराधार है, पूरी तरह गलत है। सेक्स संतुष्टी में पुरूष के लिंग का साइज़ कोई मायने नहीं रखता है। बशर्ते स्त्री-पुरूष के बीच प्यार और अच्छी understanding हो। वैसे भी संभोग का आनंद दम्पत्ति के खुश मिजाजी और जिंदादिली पर निर्भर करता है। दोनों अच्छा फोरप्ले करते हुए संभोग में आगे बढ़ रहे हों और स्त्री को इसमें आनंद की अनुभूति हो रही है, तो लिंग का साइज़ केवल भ्रम बनकर रह जाता है।

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तीसरा भ्रम:
विवाह से पहले कोई पुरूष अगर हस्तमैथुन करता आया हो, तो वह पहली बार संभोग के दौरान जल्दी ही स्खलित हो जाता है। उसका आनंद और सेक्स अधूरा रह जाता है। उसे अपनी सेक्स लाइफ में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
सच्चाई: चिकित्सा विज्ञान के अनुसार हस्तमैथुन से पुरुषों की सेहत, सेक्स क्षमता, प्रजनन क्षमता आदि पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। हां, इतना अवश्य है कि यदि कोई पुरूष ऐसी विचारधार मन में पाल बैठे कि हस्तमैथुन के कारण वह कमजोर और शक्तिहीन हो गया है, तो केवल उसकी इस सोच का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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 चौथा  भ्रम:
पहली बार संभोग करते समय कमरे में रोशनी भरपूर होनी चाहिए। यानी लाईट आॅन करके संभोग का आनंद लेना चाहिए, क्योंकि इससे एक-दूसरे को तन से और मन से अच्छी तरह समझा जा सकता है।
सच्चाई: पहली बात तो सेक्स के लिए रोशनी या अंधेरा कोई मायने नहीं रखता। अगर कोई चीज मायने रखती है, तो वो है दोनों की आपसी रजामंदी और सहजता। अगर स्त्री और पुरूष दोनों को रोशनी में सेक्स करने पर कोई आपत्ति या झिझक नहीं है, तो रोशनी में भी संभोग का आनंद लिया जा सकता है। और यदि स्त्री या पुरूष दोनों में से कोई भी एक केवल अंधेरे में सेक्स करना चाहता है, तो अंधेरे में संभोग करने में ही समझदारी है। ज्यादातर स्त्रियां अंधेरे में ही सेक्स करना पसंद करती हैं, क्योंकि स्वाभाविक नारी लज्जा के कारण वे रोशनी में अपने पहले सेक्स के दौरान अंग पर्दशन से शरमाती हैं और सही से सेक्स का आनंद नहीं ले पातीं। स्त्रियां अंधेरे में आरामदायक और सहजता का एहसास करती हैं। वैसे भी संभोग के समय ज्यादातर स्त्रियां अपनी आंखें बंद ही रखती हैं। एक-दूसरे के ‘सहयोग‘ से रोशनी की कमी स्वयं पूर्ण हो जाती है।

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पांचवां भ्रम:
सुहागरात में पहली बार संभोग के दौरान स्त्री को निकलने वाला ब्लड उसके कुंवारेपन का सर्टीफिकेट होता है।
सच्चाई: भले ही कोई स्त्री पहली बार संभोग का अनुभव क्यों न ले रही हो, मगर इसमें उसे रक्तस्राव हो, ऐसा जरूरी नहीं है। Hymen(एक प्रकार की झिल्ली) जन्म के समय से ही absent रह सकती है। बहुत ज्यादा मुमकिन है कि Hymen खेलकूद या किसी अन्य शारीरिक काम के दौरान पहले ही नष्ट हो गई हो, इसलिए ऐसी बातों से कोई निष्कर्ष निकालना बिल्कुल गलत है।

छठवां भ्रम:
विवाह के पश्चात् स्त्रियां सुहागरात को ही संभोग क्रीड़ा के लिए उत्सुक रहती हैं।
सच्चाई: स्त्रियां मैथुन क्रिया से पहले अपने साथी के व्यवहार को अच्छी तरह से जानने को उत्सुक रहती हैं। अपने साथी से वे पहले-पहल केवल प्यार ही चाहती हैं।

सातवां भ्रम:
सुहागरात में पति-पत्नी के बीच संभोग होना जरूरी है। अगर नव-दम्पत्ति सुहागरात में संभोग नहीं करते हैं, तो इससे उनका वैवाहिक और यौनिक जीवन प्रभावित होता है। उनकी रिश्ते की बुनियाद विवाह के प्रारम्भ में ही कमजोर होने की संभावना होती है।
सच्चाई: यह सोच व विचार धारा जो सुहागरात को लेकर लोगों के मन में है, बिल्कुल गलत और मिथ्या है। सुखी वैवाहिक जीवन का मूल मंत्र पति-पत्नी का आपसी प्यार, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना होता है।

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