Dulhan Ko Kaise Kare Khush

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दुल्हन को खुश कैसे करें

सुहागरात में ऐसे बनायें दुल्हन को अपना दीवाना!

विवाह के बाद सुहागरात की रस्म एक ऐसी प्रथा है, जिससे हर युवा स्त्री-पुरूष को एक न एक दिन वाकिफ होना ही पड़ता है। सुहागरात को लेकर दूल्हा और दुल्हन दोनों के मन में विभिन्न प्रकार के भ्रम, सवाल और विचार होते हैं, जिनका वह जल्द से जल्द हल पा लेना चाहते हैं। एक-दूसरे के नजदीक आकर इस लम्हें की एक-एक याद को सुनहरा बनाकर अपने जीवन में उतार लेना चाहते हैं।
लेकिन ले-देकर बात वही आ जाती है, कि आखिर शुरूआत कैसे हो?, बातचीत की शुरूआती चर्चा क्या होनी चाहिए?, बहाना क्या होना चाहिए? क्या हो पायेगा? या फिर नहीं हो पायेगा? होगा तो कैसे होगा? क्या करेंगे, क्या कहेंगे इत्यादि तरह-तरह की बातों के मकड़ जाल मन को घेरे रहते हैं।

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इन्हीं सब बातों की चर्चा हम इस सुहागरात के हिंदी लेख में करने वाले हैं। अगर आप पुरूष हैं और आपकी शादी जल्द ही होने वाली है, तो यह हिंदी लेख आ सकता है आपके बहुत काम।

इस लेख को पूरा पढ़ें और जानें कि कैसे सुहागरात में आप बना सकते हैं अपनी दुल्हनियां को अपना दीवाना, ताकि जिंदगी भर याद रहे उसे सुहागरात का सफर सुहाना!

धैर्य रखें, आराम करें :
सुहागरात को लेकर बस एक यही धारणा मन में रहती है कि दो जिस्मों का मिलन। यानी इस रात्रि को दूल्हा और दुल्हन के बीच शारीरिक संबंध स्थापित होना ही होना है। जोकि पूरी तरह से सही नहीं है और न ही पूरी तरह से एकदम गलत ही ही है। सुहागरात को केवल शारीरिक मिलन से जोड़कर देखना ही गलत होगा। इस रात को आप संभोग करें ही करें यह जरूरी नहीं है। जरूरी है तो आप दोनों के बीच का विश्वास, एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्यार। ध्यान रहे ये ही वो रात है जो आपके वैवाहिक जीवन की पहली नींव रखेगी, इसलिए किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती या दबाव एक-दूसरे पर कोई भी न बनायें।
दरअसल शादी विवाह की लंबी रस्में निभाते-निभाते दूल्हा-दुल्हन दोनों इतने थक जाते हैं, कि शादी की पहली रात को ही सबकुछ आराम से हो जाना दोनों के लिए कभी-कभी बहुत मुश्किल होता है। इसलिए हो सके तो इस रात एक-दूसरे की बाहों में बांहें डाले केवल प्यार भरी बातें करते हुए सो जायें। पूरी तरह अपने शरीर को आराम दें। ताकि अगली रात या फिर हो सके तो सुबह-सुबह ताजगी महसूस करने पर आपसी सहमति से संभोग कर सकते हैं।

साज-श्रृंगार उतारने में सहयोग करें :

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विवाह के कई दिनों पहले से ही लड़का और लड़की अपने साज-श्रृंगार के लिए कपड़े, गहने इत्यादि खरीदने में जुट जाते हैं। ताकि विवाह के समय दोनों ही खूबसूरत और आकर्षक लग सकें। मगर दुल्हन के वस्त्र, दूल्हे के वस्त्रों की अपेक्षा काफी भारी-भरकम होते हैं और गहनों इत्यादि से किया गया साज-श्रृंगार भी बहुत ज्यादा होता है। इसलिए सुहागरात की सेज पर पहुंच कर दुल्हन इतना थक जाती है कि वह जल्द से जल्द अपने तन से इन भारी भरकम वस्त्रों और गहनों से मुक्त हो जाना चाहती है। ताकि वह सहज, आरामपूर्ण और खुद को हल्का-फुल्का महसूस कर सके। दूल्हे के लिए यह सब बहुत आसान होता है, मगर दुल्हन को इसमें बहुत मेहनत करनी पड़ती है, जिसमें काफी समय लग जाता है।
बस..! यहीं पर दुल्हे की ड्यूटी शुरू हो जाती है। आपको चाहिए कि आप अपनी दुल्हन के इस कार्य में उसकी मदद करें। इससे वह आपके प्रति सम्मान की भावना और भी अधिक रखने लगेगी।

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पत्नी को अपने और अपने परिवार के प्रति सहज करवायें :
पुरूष एक बात का विशेष ध्यान रखें। बिस्तर पर जाते ही ‘मिलन’ के लिए उतावली न दिखायें। याद रखें वह आपकी पत्नी जरूर है, लेकिन अभी-अभी नये परिवार में आई है, वो भी अपने पहले परिवार और अपनों को छोड़कर, सिर्फ आपके भरोसे, आपके लिए। इसलिए आपका यह फर्ज बनता है कि आप उसे सबसे पहले अपने घर में अपने साथ कम्फ्र्टेबल महसूस करवाने का प्रयत्न करें। आप एक-दूसरे की पसंद और नापसंद को जानें, आदतों को जानें। यहां तक कि पुरूष को चाहिए वो अपने परिवार के उन सब सदस्यों के जिनके साथ दुल्हन को लंबा वक्त बिताना है, उनकी भी पसंद-नापसंद और अच्छी-बुरी आदतों के बारे में दुल्हन को बताये। इसस होगा यह कि दुल्हन को परिवार के सभी सदस्यों के साथ सही व्यवहारिक संतुलन बनाने में मदद मिलेगी और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

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आप भी दुल्हन के परिवार के बारें में जानने का प्रयत्न करें। उनके नाते-रिश्तेदार या फिर शादी में उनके परिवार की ओर से कोई भी बात या रस्म पसंद आई हो तो उसकी प्रशंसा जरूर करें। शादी में किये गये सम्मान की सराहना करें। ये सब दुल्हन को एक अलग ही प्रकार का आनंद देगा, जो उसे पूरी तरह तरोताजा कर देगा और वह भी आपके विचारों की मुरीद हो जायेगी।

एक-साथ तोहफा खोलें :
विवाह में दूल्हा और दुल्हन दोनों को बहुत से उपहार भेंट स्वरूप मिलते हैं। ये सभी तोहफें दूल्हा-दुल्हन के लिए अनमोल होते हैं। किन्तु जो तोहफे दुल्हन अपनी ससुराल से लेकर आई होती है, उनका अपना ही एक अलग महत्व होता है। यहां पति को चाहिए कि जब पत्नी इन तोहफों को खोले, तो आप इसमें पत्नी के साथ बैठकर उसका सहयोग करें और एक-एक तोहफे की प्रंशसा करते हुए उनके बारे में जानने का प्रयास करें। जैसे कि कौन सा तोहफा किसने दिया? उन्हें कौन सा तोहफा सबसे प्रिय है और क्यों प्रिय है? इन सब बातों के दौरान यदि पत्नी भावुक हो जाये, तो उसे स्नेह दे, उसके आंसू पोंछे। यदि वह मुस्कराये तो साथ में मुस्करायें, हंसे तो साथ में खिलखिलायें। इससे पत्नी आपको सम्मान की नजरों से देखने लगेगी और वह आपके साथ सहज महसूस करेगी। उसे लगेगा कि आप उसकी बातों और उसकी भावनाओं सम्मान करते हैं। दुल्हन को यह सोचकर गर्व महसूस होगा कि उसका पति अन्य पुरूषों की तरह केवल जिस्म पाने के लिए नहीं मरता। वह एक औरत का सम्मान करना जानता है।
इसलिए एक बार फिर कहना चाहूंगा कि इस रात को हम-बिस्तर होने के लिए उतावली न दिखायें। पत्नी को धीरे-धीरे करीब लाने का प्रयास करें और वह तब भी संभोग के लिए राजी नहीं होती है, तो धैय रखें और यह समझ लें कि वह अभी आपके साथ पूरी तरह सहज महसूस नहीं कर रही है। ध्यान रखें यह केवल आपके लिए ही नहीं, दुल्हन लिए भी पहली बार है। दूसरी बात शर्म, संकोच करना दुल्हन के लिए स्वाभाविक है, इसलिए एक ही रात मेें सबकुछ पा लेने के लिए बेकरारी न दिखायें।
अगर आप अपनी चाहत पर काबू रखते हैं तो पक्के तौर पर भविष्य में पूरा आनंद ले पायेंगे।

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